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योगी के अरमां आंसुओं में बह गये! गोशालाओं में करोड़ों का घोटाला, सड़कों पर गोवंश

 
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विनोद मिश्रा
बांदा।
चित्रकूट मंडल में अन्ना पशुओं पर रोक के लिये योगी सरकार लाख ख्याली अरमान पाले, लेकिन उसके "दिल के अरमां आसुवों में बह गये"। यथा स्थिति ज्यो की त्यों बरकरार है।अन्ना पशु की सड़कों पर भरमार है। दूसरी तरफ पशुपालन विभाग इन्हें गोशालाओं में संरक्षित बताकर करोड़ों रुपये का चारा-भूसा खिलाने का "खेल" खेल रहा है। बीते अगस्त माह के आंकडो के अनुसार मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा में गोशालाओं में पशुओं के भरण-पोषण पर 58 करोड़ 92 लाख 37 हजार रुपये खर्च हुए हैं।
बांदा जिले में 26 करोड़ सात लाख, चित्रकूट जिले में आठ करोड़ 94 लाख, महोबा जिले में 12 करोड़ 70 लाख और हमीरपुर जिले 11 करोड़ 13 लाख रुपये खर्च बताया गया है।
मंडल में पशुपालन विभाग के कागजी आंकड़ों के मुताबिक, 1,29,385 पशु गोशालाओं में संरक्षित हैं। इनके अलावा चारों जनपदों में 8615 अन्ना पशुओं को किसानों/ग्रामीणों की सुपुर्दगी में सौंपा गया है।
इसमें हमीरपुर जिले 3477, महोबा जिले में 2447, बांदा जिले में 561 और चित्रकूट जिलेमें 2130 अन्ना गायें शामिल हैं।
चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के लिए गोशालाओं में दो लाख 16 हजार 70 पशु संरक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन गोशालाओं में सिर्फ 1,29,385 पशु ही संरक्षित हैं। यानि लक्ष्य से 86,685 पशु कम हैं।
हालत यह हैं की अन्ना जानवर फसलें बर्बाद कर किसानों को कंगाल बना रहें हैं। इस कंगाली को रोकने के लिए योगी सरकार आकड़ों के "योग "में ही अपने अरमानों को कसौटी पर खरा मान रही है। 

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