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मंजरे इस्लाम ई-पाठशाला द्वारा युवाओं ने जाना मुस्लिम क्रान्तकारी नवाब ख्वाजा सलीम उल्लाह बहादुर का जीवन परिचय

बरेली-डीवीएनए। मरकजे अहले सुन्नत दरगाहे आला हजरत स्थित मदरसा मंजरे इस्लाम महत्वपूर्ण आवश्यकता को दृष्टिगत...
 
मंजरे इस्लाम ई-पाठशाला द्वारा युवाओं ने जाना मुस्लिम क्रान्तकारी नवाब ख्वाजा  सलीम उल्लाह बहादुर का जीवन परिचय

बरेली-डीवीएनए। मरकजे अहले सुन्नत दरगाहे आला हजरत स्थित मदरसा मंजरे इस्लाम महत्वपूर्ण आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए लगातार युवाओं, मुस्लिम समुदाय और छात्रों को आनलाइन ई-पाठशाला द्वारा हिन्दू मुस्लिम एकता के पक्षधर तथा आपसी सौहार्द के अलंबदार देश प्रेमियों और क्रान्तकारियों के संबन्ध में विस्तृत जानकारी प्राप्त करा रहा है।
दिनांक 7 जून सन् 1871 को चूंकि बंगाल की सरजमीन पर अंग्रेजी साम्राज्य से टक्कर लेने वाले और बंगाल में तहरीके आजादी की पटकथा लिखने वाले एक महान क्रान्तकारी नवाब सर ख्वाजा सलीम उल्लाह का जन्म हुआ था इसलिए मंजरे इस्लाम की इस ई- पाठशाला द्वारा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी श्री जगमोहन साहब के तत्वाधान में मंजरे इस्लाम के वरिष्ठ शिक्षक एवं वुद्धजीवि मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने आजादी की जंग में और भारत को अंग्रेजी साम्राज्य से मुक्ति दिलाने में नवाब सलीम उल्लाह खान के विशेष योगदान तथा अग्रणीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को बताया कि ढाका के नवाब सलीम उल्लाह ने नवाब सिराजुद्दौला के बाद बंगाल की सरजमीन पर ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध एक मजबूत आवाज बुलंद की थी वह हिन्दू मुस्लिम एकता के अलंबरदार थे वह यह जानते थे कि आपसी सौहार्द और हिन्दू मुस्लिम एकता के बिना हिन्दुस्तानियों को अंग्रेजी शासन से मुक्ति नहीं मिल सकती इसलिए उन्होंने पूरे पूर्वी और पश्चिमी अखण्ड बंगालियों को एकजुट किया सबके अंदर आजादी की ज्योति जलायी अंग्रेजों के विरूद्ध आजादी की मुहिम चलायी । मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी साहब ने यह भी बताया क नवाब सलीमुललाह ने अपनी कूटनीति से बंगाल ओर बंगालियों के हितों की रक्षा भी की। आजादी के मतवालों को एक विशालकाय मजबूत प्लेटफार्म उपलब्ध कराया और उनको संरक्षण प्रदान किया। 1906 ई0 में अधिकारिक तौर पर आल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना की और नवाब सलीम उल्लाह इसके संस्थापक अध्यक्ष बने । ढाका में उन्होंने एक बहुत बड़ा शैक्षिक सम्मेलन भी आयोजित किया जिसमें मौलाना मो0 अली जौहर, डा0 जाकिर हुसैन, मौलाना शौकत जैसे लीडर सम्मिलित हुए।
मंजरे इस्लाम आई0टी0 सेल के प्रमुख जनाब जुबैर रजा खान साहब ने बताया कि मंजरे इस्लाम ई-पाठशाला द्वारा आयोजि इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से हमारे युवा मुस्लिम क्रान्कारियों के इतिहास का भलिभांति ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं और इस ज्ञान की प्राप्ति में काफी रूचि दिखा रहे हैं उन्होंने बताया कि नवाब सलीम उल्लाह ने 43 वर्ष की थोड़ी सी आयु पायी थी मगर वह बंगाल की सरजमीन पर आजादी की ऐसी पठकथा लिख गये जो आगे चलकर हिन्दुस्तान की आजादी में मील का पत्थर साबित हुई। सन् 1913 में उनका देहांत हो गया। वह एक सच्चे मुसलमान भी थे और सच्चे देश प्रेमी भी। वह पहले मुसलमान थे जिन्होने ईस्ट इंडिया कम्पनी की पुरजोर मुखालफत की। वह बंगाल में शिक्षा के प्रमुख संरक्षक थे उनका मानन था कि अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिए जहां एक तरफ बहादुर योद्धाओं और क्रांतकारियों की आवश्यकता है तो वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान को शिक्षित समाज की भी जरूरत है। नवाब सलीम उल्लाह ने ढाका में एक विश्वविद्यालय और प्रतिष्ठित एहसान उल्लाह स्कूल आफ इंजीनियरिंग की स्थापना की ।
उन्होंने अखबारों के माध्यम से मुस्लिम नेताओं के नाम एक अनुरोध पत्र प्रकाशित कराकर मुस्लिम अखिल भारती परिसंघ की स्थापना का प्रस्ताव दिया। उन्हें अपने वतन हिन्दुस्तान से बेपनाह मोहब्बत थी । ऐसे ही देश प्रेमियों की वजह से हम आज इस देश मे आजादी की सांस ले रहे हैं ।हमें इनसे प्रेरणा लेकर अपने देश की अखंण्डता और सौहार्द की रक्षा के लिए हर समय प्रयासरत रहना चाहिए।

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