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पीएम केयर फंड से मिले घटिया क्वालिटी वेंटिलेटर ने बच्चे की ले ली जान

कानपुर (DVNA)। पीएम केयर फंड से मिले घटिया क्वालिटी वेंटिलेटर ने एक बच्चे की जान...
 
पीएम केयर फंड से मिले घटिया क्वालिटी वेंटिलेटर ने बच्चे की ले ली जान

कानपुर (DVNA)। पीएम केयर फंड से मिले घटिया क्वालिटी वेंटिलेटर ने एक बच्चे की जान ले ली। इसका खुलासा कानपुर मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) के बाल रोग विशेषज्ञ की चिट्ठी से हुआ है। डॉक्टर ने चिट्ठी में साफ लिखा है कि वेंटिलेटर खराब है। ये चलते-चलते अपने आप बंद हो जाते हैं। वेंटिलेटर अचानक बंद होने के चलते एक बच्चे की जान चली गई। मेडिकल कॉलेज सूत्रों ने बताया कि पीएम केयर फंड से यह वेंटीलेटर आवंटित हुए थे।
डॉक्टर की चिट्ठी को बाल रोग विशेषज्ञ विभाग के अध्यक्ष ने भी प्रिंसिपल को आगे बढ़ाते हुए वेंटिलेटर को हटाने की मांग की है। ऐसा न होने की स्थिति में और भी मौतें होने की आशंका व्यक्त की गई है। बाल रोग विभाग की तरफ से इस मामले में दो बार प्रिंसिपल को लेटर लिखा जा चुका है। एक चिट्ठी 25 मई 2021 और दूसरी 6 जुलाई 2021 को लिखी गई है। हालांकि, इसमें ये नहीं बताया गया है कि खराब वेंटिलेटर के चलते बच्चे की मौत कब हुई?
दो बार प्रिंसिपल को लिखा गया था लेटर
पहला लेटर 21 मई 2021 का है। आईसीयू इंचार्ज की तरफ से मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को यह पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज को 26 वेंटिलेटर अप्रैल 2020 में उपलब्ध कराए गए थे। कंपनी इंजीनियर की कोशिशों के बाद भी इसे एक बार भी ठीक से नहीं लगाया जा सका है। हमारे पास एल.3 लेवल कोविड अस्पताल में अति गंभीर मरीज आते हैं। जिनके फेफड़ों में गंभीर संक्रमण होता है। यह वेंटिलेटर यहां भर्ती मरीजों की जरुरत के मुताबिक ऑक्सीजन और वेंटिलेटर देने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में इसे उन अस्पतालों में भेज दिया जाए,जहां कम गंभीर मरीज होते हैं।
वहां की प्रभारी डॉ नेहा अग्रवाल ने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर बताया था कि खराब वेंटिलेटर से एक बच्चे की मौत हो गई है। इसे बदला जाना चाहिए। इस आधार पर विभागाध्यक्ष प्रो यशवंत राव ने 6 जुलाई को प्राचार्य को पत्र लिखकर डॉ नेहा अग्रवाल की रिपोर्ट की ओर ध्यान दिलाया है। इसमें लिखा है पीआईसीयू में स्थापित दो वेंटिलेटर चलते-चलते रुक जाता है। इस बारे में पहले भी बताया गया है। इसमें एक वेंटीलेटर के अचानक रुक जाने के कारण एक बच्चे की मौत हो गई। ऐसे में इन वेंटीलेटर को शिशु रोगियों में इस्तेमाल किया जाना ठीक नहीं है।

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