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चित्रकूट मंडल के बांधो में सबसे खराब स्थिति में महोबा!

बांदा (DVNA)। खेत औऱ पेट को पानी के लिये तरस रहें चित्रकूटधाम मंडल के बांधों...
 
चित्रकूट मंडल के बांधो में सबसे खराब स्थिति में महोबा!

बांदा (DVNA)। खेत औऱ पेट को पानी के लिये तरस रहें चित्रकूटधाम मंडल के बांधों में पानी की सबसे खराब स्थिति महोबा जनपद की है। यहां स्थित सभी पांचों बांधों में पानी का जबरदस्त टोटा है। सिंचाई विभाग के मुताबिक, यहां कबरई और मझगवां बांधों में उपयोगी पानी खत्म हो चुका है। उर्मिल बांध में तो मात्र 1.44 और चंद्रावल में 2.35 मिलियन घट मीटर उपयोगी पानी बचा हुआ है। इसी तरह से यहां के अर्जुन बांध में भी सिर्फ 1.86 मिलियन घन मीटर उपयोगी पानी बचा है।
चित्रकूटधाम मंडल चार बांधों में बचे खुचे पानी से ही सिंचाई विभाग पशुओं की प्यास बुझाने के लिए पोखर और तालाब भरने की कवायद कर रहा है। विभाग का दावा है कि चित्रकूट में गुंता व रसिन, महोबा में अर्जुन व चंद्रावल बांध और हमीरपुर में मौदहा बांध में उपलब्ध पानी से नहरें चलाकर पोखर व तालाब भरे जा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि पानी की कमी से कितने पोखर और तालाब भर पाएंगे, कहा नहीं जा सकता है।
चित्रकूटधाम मंडल के सभी 13 बांध विभिन्न नदी और बड़े नालों में बनाए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़े बांध/वियर केन नदी में हैं। गंगऊ और बरियारपुर वियर केन नदी में बनाया गया है। रनगवां बांध केन की सहायक नदी बन्ने नदी में बना है। अन्य बांध बड़े नालों में बने हुए हैं। बारिश का पानी इन नालों से होकर इन बांधों तक पहुंचता है। इन सभी बांधों की स्थित काफी खराब है। पानी के नाम पर अब तलहटी ही दिख रही है।
केन नहर प्रखंड के अधिशाषी अभियन्ता एके पांडे बताते है की बांधों की स्थिति बांदा के लिए बीते सालों से भी बदतर रही। रनगवां और बरियारपुर बांध,वियर से सिंचाई विभाग हर वर्ष मई के पहले पखवाड़े में नहर चलाकर पशुओं की प्यास बुझाने के लिए तालाब और पोखर भरता था। अबकी मई से पहले ही बांध जवाब दे गए। नतीजे में तालाब या पोखर नहीं भर पाए। अब तालाबों और पोखर भरने के लिए बारिश का ही भरोसा है। बारिश होने के बाद इनके भरने की संभावना लोग जता रहे हैं।
बारिश हुई तो अगले हफ्ते से नहर
खरीफ की अगली फसल के लिए बांदा के किसानों को सिंचाई के पानी का दारोमदार मानसून पर निर्भर रहेगा। बारिश होगी तभी पानी मिलेगा। जुलाई के पहले हफ्ते से 31 अक्तूबर तक खरीफ के लिए नहरें चलाईं जाएंगी। बशर्ते तब तक पर्याप्त बारिश हो और बांध भर जाएं। पानी न होने से इस वर्ष मई में तालाब और पोखर भरने के लिए नहरें नहीं चलाईं जा सकीं।

विनोद मिश्रा

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