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करोड़ों के विकास कार्य लेकिन मानक का बोर्ड गायब, कही कमीशनबाजी का खेल तो नही

महराजगंज-DVNA। सिसवा नगर पालिका परिषद में इस समय करोड़ो रूपये के विकास कार्य बड़ी तेजी...
 
करोड़ों के विकास कार्य लेकिन मानक का बोर्ड गायब, कही कमीशनबाजी का खेल तो नही

महराजगंज-DVNA। सिसवा नगर पालिका परिषद में इस समय करोड़ो रूपये के विकास कार्य बड़ी तेजी से हो रहे है, लेकिन गुणवत्ता के नाम पर टेण्डर के नियमों की धज्जियां उड़ायी जा रही है, हालत यह है कि कही भी हो रहे निर्माण कार्यस्थल पर मानक या लागत का एक अदद बोर्ड भी नही मिलेगा जिससे जनता का जानकारी हो सके कि मानक व लागत क्या है, कहां से कहां तक निर्माण होना है व ठेकेदार कौन है, रही बात अधिकारियों की तो उनकी बात ही निराली है, उन्हे यह दिखाई ही नही दे रही है, बस टेण्डर निकालने व ठेकेदार को निर्माण कार्य देने में ही समय नही बच रहा है, अब वे निर्माण स्थलों पर जा कर जांच कैसे करें।
बताते चले सिसवा को जब से नगर पंचायत से नगर पालिका परिषद का दर्जा मिला है, सीमेंट वाली सड़को व सीमेंट वाली नालियों के निर्माण मे तेजी आ गयी, सबसे ज्यादा तेजी तो कमेटी के हटने और प्रशासक के बैठने के बाद आयी है, विकास कार्यों के प्रति अधिकारी इतने मुस्तैद है कि निर्माण कार्यों के टेण्डर लगातार निकल रहे है, चाहे सीमेंट वाली नाली हो या नाला निर्माण, चाहे सीमेंट वाली सड़क हो या फिर नगर पालिका क्षेत्र को उजाला करने के लिए लाइट की खरीद, लेकिन इस मे किस तरफ धज्जियां उड़ायी जा रही है शायद उनके पास देखने व जांच करने का समय ही नही मिल रहा है।
हालत यह है कि करोड़ो रूपये के सीमेंट वाली नाली व नाला के साथ ही सीमेंट वाली सड़कों को निर्माण तेज गती से हो रहा है लेकिन किसी भी कार्यस्थल पर एक अदद बोर्ड आप को देखने को नही मिलेगा कि आखिर उस निर्माण की लागत क्या है, मानक क्या है और कहा से कहां तक निर्माण होना है, या फिर ठेकेदार कौन है, जब कि निर्माण स्थल पर बोर्ड अवश्य होना चाहिए, लेकिन लगाये का कौन, सवाल तो यह है, अगर बोर्ड लग गया तो पूरी कहानी ही खुल जाएगी, फिर धज्जियां कैसे उड़ेंगी।
लोगों को तो अब साफ कहना है कि करोड़ों खर्च कर विकास कार्य तो किया जा रहा है लेकिन गुणवत्ता देखी जाए तो यह साफ हो जाएगा कि कही न कही भीषण कमीशनबाजी का खेल चल रहा है इस लिए निर्माण कार्यो में खुल कर मानक की धज्जियां उड़ायी जा रही है।
इतना ही नही लोगों का यह भी कहना है कि अधिकारी किसी भी कार्य स्थल पर जाते ही नही है जिससे पता चले कि निर्माण कार्य में किस तरह धांधली हो रही है।

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