एमपी स्टार्ट-अप नीति से मध्यप्रदेश बनेगा आत्म-निर्भर : एमएसएमई मंत्री सखलेचा

एमपी स्टार्ट-अप नीति से मध्यप्रदेश बनेगा आत्म-निर्भर : एमएसएमई मंत्री सखलेचा
 
एमपी स्टार्ट-अप नीति से मध्यप्रदेश बनेगा आत्म-निर्भर : एमएसएमई मंत्री सखलेचा

भोपाल :  आत्म-निर्भर भारत एवं आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के उद्देश्यों की पूर्ति के दृष्टिगत मध्यप्रदेश में एमपी स्टार्ट-अप नीति एवं कार्यान्वयन योजना-2022 लागू की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 मई को इस पॉलिसी का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। मुख्य समारोह इंदौर में होगा।

सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने बताया कि एमपी स्टार्ट-अप नीति से मध्यप्रदेश आत्म-निर्भर बनेगा। नवाचार एवं स्टार्ट-अप की गतिशीलता, वैश्विक आर्थिक वातावरण में हो रहे बदलाव तथा विनियामक संशोधन के साथ ही देश की नई शिक्षा नीति के दृष्टिगत मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान की सोच अनुरूप नई स्टार्ट-अप पॉलिसी को समग्र समेकित एवं प्रभावी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है और आर्थिक विकास में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में भी है। राज्य शासन की निवेश मित्र नीतियों, उद्योग एवं व्यापारिक क्षेत्र में सरलीकरण की प्रक्रिया, आर्थिक एवं सामाजिक अधो-संरचना में विशेष प्रयासों से प्रदेश में निवेश वातावरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 

मंत्री  सखलेचा ने बताया कि राज्य शासन का प्रयास रहा है कि नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश के स्थानीय युवाओं के लिए अधिकाधिक संख्या में रोजगार सृजन किया जा सके। इसी श्रृंखला में स्टार्ट-अप नीति लागू की गई है। राज्य शासन ने नवीन नीति में स्कूल, महाविद्यालयीन स्तर से छात्रों में नवाचार एवं स्टार्ट-अप की भावना जागृत करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। नीति को व्यापक रूप से लागू करने और शासन के विभिन्न प्रावधानों को प्रभावी रूप से अंगीकृत करने के लिए व्यवस्था की गई है। 

मंत्री सखलेचा ने बताया कि नीति को मात्र वित्तीय सहायता तक सीमित न रख कर स्टार्ट-अप को संस्थागत, ईज ऑफ डूईंग बिजनेस, बुनियादी अधो-संरचना, राज्य की उपार्जन नीति, विपणन तथा अन्य प्रोत्साहन सहयोग प्रदान करना उददेश्य है। नीति का उल्लेखनीय पहलू यह भी है कि इसमें उत्पाद आधारित स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष वित्तीय एवं गैर-वित्तीय सुविधाओं का समावेश किया गया है।

सकारात्मक हस्तक्षेप और अन्य उत्प्रेरक कार्यक्रमों के माध्यम से स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी- तंत्र का विकास नीति में समावेशित है। स्टार्ट-अप इण्डिया में भारत सरकार में पंजीकृत एवं मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप में 100 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करने के साथ ही कृषि और खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप इण्डिया, भारत सरकार में पंजीकृत एवं मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप में 200 प्रतिशत विकास दर प्राप्त करना प्रमुखता से शामिल है। इसी तरह उत्पाद आधारित स्टार्ट-अप की संख्या में वृद्धि नीति का उद्देश्य है। 

मंत्री  सखलेचा ने कहा कि नीति का उद्देश्य  भारत सरकार की स्टार्ट-अप रैंकिंग में राज्य को उच्च स्थान दिलाना है। उन्होंने कहा कि उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए नीति पाँच स्तंभों के अनुसरण पर केंद्रित है। ईज ऑफ डुईंग बिजनेस सहित संस्थागत सहयोग, उत्पाद आधारित स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देना, विपणन सहयोग और वित्तीय एवं गैर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना नीति में प्रमुखता से शामिल है। 

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