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29 से शुरु हो रहा उपार्जन, बाहर की धान खपाने रैकेट की शुरु हो गई तैयारी

सतना। खरीफ 2021 के लिये धान उपार्जन का कार्य आगामी 29 नवम्बर से शुरु होने...
 
29 से शुरु हो रहा उपार्जन, बाहर की धान खपाने रैकेट की शुरु हो गई तैयारी

सतना। खरीफ 2021 के लिये धान उपार्जन का कार्य आगामी 29 नवम्बर से शुरु होने जा रहा है लेकिन रोजाना 15 से 20 ट्रक धान यूपी से चित्रकूट के रास्ते सतना पहुंचना शुरु हो गई है। इक्का-दुक्का ट्रकों को पकड़कर भले ही प्रशासन कार्रवाई का ढिंढोरा पीट लेता हो लेकिन अनाज की तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बाहर से आ रहे अनाज का संग्रहण प्रमुख तौर पर मैहर और अमरपाटन में हो रहा है। उल्लेखनीय है कि धान का समर्थन मूल्य पिछले साल 1868 रुपये प्रति क्विंटल था जो वर्ष 2021-22 के लिए बढ़ाकर 1940 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि बाहर की धान 1430-1435 रुपये क्विंटल की दर से आ रही है, जिसका खामियाजा स्थानीय किसानों को भोगना पड़ेगा। धान उपार्जन के लिये किसानों द्वारा पंजीयन कराया जाता है।

उनके रकबे का भी सत्यापन होता है बावजूद इसके गेहूं या धान उपार्जन में गड़बड़ी लगातार जारी है। इसका कारण सिर्फ 50 रुपये क्विंटल के लालच में जो किसान सरकारी केन्द्रों में बिक्री नहीं करते वे भी पंजीयन करा लेते हैं। उनके नाम से उपार्जन होता रहता है और राशि भी उनके खाते में आती है। बाद में वास्तविक विक्रेता 50 रुपये क्विंटल काट कर शेष राशि किसान से प्राप्त कर लेता है।

यह सारा खेल गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों व अन्य लोगों के साथ ही केन्द्र प्रभारियों, किसान और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से होता है। अभी अप्रैल और मई में हुए गेहूं उपार्जन के दौरान जिले के मैहर-अमरपाटन से लेकर कोटर, विरसिंहपुर और कोठी तक बाहर का गेहूं बिकने के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। यहां तक कि उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य विभाग के खाली बोरे व बोरों में भरा गेहूं भी जप्त हुआ था पर बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार भी पंजीयन में इसी तरह का गोलमाल देखने को मिल रहा है। अमरपाटन में तो मर्यादपुर सहकारी समिति के प्रबंधक व आपरेटर द्वारा व्यापक पैमाने पर पंजीयन में गड़बड़ी का मामला भी सामने आ चुका है। 16 किनों के नाम 405 एकड़ के करीब का फर्जी पंजीयन करने पर एफआईआर के निर्देश भी जारी हुुए हैं पर यह तो सिर्फ एक समिति का मामला है। जिले में इस तरह के सैंकड़ों नहीं बल्कि हजारों की संख्या में फर्जी पंजीयन होने की संभावना है।
अनिल पुरोहित/अशफाक

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