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दो सिर वाला बच्चा हुआ तो छोड़कर भागे परिजन

रांची। रांची में एक निर्दयी मां अपने दुधमुंहे बच्चे को जन्म के साथ ही छोड़कर...
 
दो सिर वाला बच्चा हुआ तो छोड़कर भागे परिजन


रांची। रांची में एक निर्दयी मां अपने दुधमुंहे बच्चे को जन्म के साथ ही छोड़कर भाग गई। फर्जी पता के साथ हॉस्पिटल में एडमिट हुई मां ने नवजात को उसके हिस्से का पहला दूध तक नहीं पिलाया। उसका कसूर बस इतना था कि वह जन्म से ओसिपिटल मेनिनजो इंसेफालोसिल नामक बीमारी से पीडि़त था।बताया जाता है कि महिला 15 दिन पहले बोकारो का पता लिखवाकर राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रांची में एडमिट हुई थी। बच्चा होने के बाद वह चुपके से निकल गई। बच्चे की रोने की आवाज सुनकर सिस्टर गई तो देखा कि मां उसके साथ नहीं थी। काफी खोजबीन की गई। नहीं मिली तो अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस से संपर्क किया। जब उसके पते की जांच की गई तो फर्जी पाया गया। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ने उसे गोद लेने का निर्णय लिया।ऑपरेशन कर उसके सिर से अतिरिक्त हिस्से को हटा दिया।

फिलहाल मासूम आईसीयू में है। 10 दिन बाद उसे छुट्टी मिल जाएगी। अभी बच्चे की देखरेख करुणा संस्था कर रही है। यह डॉक्टरों की ओर से संचालित एक हृत्रह्र है। रिम्स में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. सहाय ने बताया, डॉक्टरों की टीम ने 2 घंटे तक ऑपरेशन कर बच्चे के सिर से अतिरिक्त गठरी को हटा दिया है। दवा से लेकर जांच तक सब कुछ फ्री है। ऑपरेशन में मेरे अलावा डॉ. पीयूष, डॉ. तारीक, डॉ. विकास, डॉ. गौरव और डॉ. मनीषा कुमार समेत अन्य डॉ. शामिल थे। यह एक जन्मजात बीमारी है। इसमें खोपड़ी के हड्डी से पार्ट बाहर निकल जाते हैं। सिर के बाहर एक थैली के रूप में जमा हो जाते हैं। खोपड़ी के हिस्से के साथ इसमें स्किन भी जुड़ा रहता है। जीवन भर बच्चे को इससे जूझना पड़ेगा। इसके साथ अन्य बीमारियों के होने होने की संभावन बनी रहती है। जैसे स्पाइनल कॉर्ड के भी बाहर आने के चांस रहते हैं। इसे मेनिंनजो माइनोसील कहते हैं।

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