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छोटे दलों के साथ बड़ा सियासी लक्ष्य भेदने की तैयारी में सपा

लखनऊ । समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में छोटे दलों को साथ लेकर बड़ा सियासी लक्ष्य...
 
छोटे दलों के साथ बड़ा सियासी लक्ष्य भेदने की तैयारी में सपा

लखनऊ । समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में छोटे दलों को साथ लेकर बड़ा सियासी लक्ष्य भेदने की तैयारी कर रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर यूपी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पूरब से लेकर पश्चिम तक भाजपा का मात देने के फार्मूले पर काम कर रहे हैं। पश्चिमी में सपा का रालोद के साथ गठबंधन हो चुका है। वहीं पूरब में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। अखिलेश यादव ने मध्य रूहेलखंड क्षेत्र में महानदल के साथ गठजोड़ को अंतिम रूप दिया है। इसके साथ ही उनकी नजर अपना दल कमेरावादी और आम आदमी पार्टी पर भी है। पिछले दो चुनाव 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव के अनुभव को देखते हुए अखिलेश यादव ने इस बार बड़े दलों के साथ गठबंधन से किनारा कर लिया। लेकिन उन्होंने बड़े दलों के कई दर्जन कद्दावर नेताओं को सपा में शामिल करके पार्टी की जमींनी स्तर पर मजबूती प्रदान की है।

पिछले एक साल में अखिलेश यादव ने सांसद और विधायक स्तर के कई दर्जन नेताओं को सपा से जोड़ा है। इन नेताओं का अपने क्षेत्रों में खासा प्रभाव है। हाल ही में बसपा में रहे पूर्वमंत्री लालजीवर्मा, राम अचल राजभर, कांग्रेस में रहे पूर्व संासद राजाराम पाल, इससे पहले पूर्वमंत्री राम प्रसाद चौधरी, पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी, त्रिभुवन दत्त, अन्नू टंडन, रिजवान जहीर, कादिर राणा, बाल कुमार पटेल समेत कई अन्य नेताओं सपा में शामिल किया। पूरब, पश्चिम, बुंदेलखंड समेत सभी क्षेत्रों के नेता सपाके साथ आए हैं। इनमें बसपा के कई कई वर्तमान विधायक भी शामिल है। इसके साथ ही कई छोटी पाटियों और संगठनों ने सपा में विलय भी किया है। सपा गठबंधन के सथियों का अलग-अलग क्षेत्रों में असर और प्रभाव है। रालोद का पश्चिमी यूपी के जिलों में व्यापक प्रभाव है तो वहीं ओम प्रकाश राजभर की सोहेलदेव भासपा का पूर्वी यूपी के जिलों में खासा असर है। इसी तरह से जनवादी पार्टी का पूर्वी यूपी तो महानदल का रूहेलखंड इलाके में प्रभाव है। इन चारों दलों के साथ सपा का गठबंधन तय हैं। जबकि अन्य पाटियों के साथ बात चल रही है। पिछले दो साल से अखिलेश यादव लगातार सपा जमींनी और संगठिन रूप से मजबूत कर रहे हैं। जिसका परिणाम दिखाई देने लगा है। अखिलेश की समाजवादी विजय रथयात्रााओं और रैलियों में आने वाली भारी भीड़ सपा के बढ़ते जनाधार की ओर इशारा कर रही है। अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव के लिए एक तरह जहां नए सहयोगियों जोड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जनता के मुद्दों महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के सवाल पर भाजपा सरकार पर हमलावर हैं।

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