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घर-घर राशन योजना को अब मिलेगी मंजूरी?

नई दिल्ली-DVNA। राजधानी दिल्ली में घर-घर राशन की योजना पर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल अनिल...
 
घर-घर राशन योजना को अब मिलेगी मंजूरी?

नई दिल्ली-DVNA। राजधानी दिल्ली में घर-घर राशन की योजना पर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोर स्टेप डिलीवरी की फाइल मंजूरी के लिए एक बार फिर से उपराज्यपाल को भेजी है। यह फाइल पहले भी दो बार बैजल को भेजी गयी थी लेकिन उन्होंने इसे मंजूरी नहीं दी थी।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उपराज्यपाल को फाइल भेज दी गई है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने राशन की डोर स्टेप डिलीवरी लागू करने की अनुमति दे दी है, ऐसे में आप भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दें ताकि दिल्ली में जल्द से जल्द राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना लागू हो सके। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने दिल्ली में राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना लागू करने की सशर्त इजाजत दे दी थी। राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना पर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल में काफी समय से विवाद चल रहा है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना लागू करने पर अड़ी थी, जबकि उपराज्यपाल/ केंद्र सरकार इसका विरोध कर रहे थे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को दिए अपने आदेश में दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी उचित दर दुकानों के संचालकों को उन राशन कार्डधारकों की जानकारी दें जिन्होंने घर पर ही राशन प्राप्त करने का विकल्प चुना है। हाईकोर्ट ने कहा था कि इसके बाद उचित मूल्य की दुकान के मालिकों को उन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लाभार्थियों के राशन की आपूर्ति नहीं करनी पड़ेगी, जिन्होंने घर तक सामान पहुंचाने के विकल्प को चुना है। बता दें कि दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना को दिल्ली सरकारी राशन डीलर संघ ने अदालत में चुनौती दी थी। दिल्ली सरकार का आरोप है कि केंद्र ने राजधानी में 72 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभान्वित करने वाली उसकी महत्वाकांक्षी घर-घर राशन योजना को रोक दिया और उसने इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताया था। केंद्र सरकार ने हालांकि आरोपों को आधारहीन करार दिया है। गौरतलब है कि इस योजना को पहले मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना नाम दिया गया था, लेकिन बाद में 9 मार्च को केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा एक अधिसूचना के बाद इसे हटा दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत वितरण के लिए आवंटित सब्सिडी वाले खाद्यान्न का इस्तेमाल अलग नाम से योजनाओं के लिए नहीं किया जा सकता है।

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