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कानून वापसी के बाद किसान संगठनों के रुख पर सरकार की नजर

नई दिल्ली। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद सरकार की निगाहें अब...
 
कानून वापसी के बाद किसान संगठनों के रुख पर सरकार की नजर


नई दिल्ली। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद सरकार की निगाहें अब आंदोलनरत किसान संगठनों के भावी रुख पर है। किसान संगठनों को सकारात्मक संदेश देने के लिए आंदोलन के क्रम में किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे को जल्द वापस लेने का सिलसिला शुरू किया जाएगा। इसके अलावा बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में तीनों कानूनों को वापस लेने वाले बिल को मंजूरी दी जाएगी।
तीनों कानूनों की पीएम की ओर ओर से वापसी की घोषणा के बाद सरकार और भाजपा की चिंता किसानों की नाराजगी दूर करने को ले कर है। इस क्रम में सरकार में उच्च स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी का विकल्प ढूंढने पर माथापच्ची हो रही है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान मृत किसानों के परिजनों को राहत देने के विकल्प पर भी लगातार मंथन हो रहा है। सरकार में शीर्ष स्तर पर किसानों पर दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया पर लगातार मंथन हो रहा है।


दरअसल मृत किसानों के परिजनों को मुआवजा देने के मामले में तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर ने सरकार को उलझा दिया है। चंद्रशेखर ने शनिवार को ऐसे सात सौ किसान परिवारों को तीन-तीन लाख रुपये की मुआवजा की घोषणा की है, जिनके परिवार के अपनों की आंदोलन के दौरान किसी कारण से मौत हो गई। आंदोलनरत किसान संगठन भी मौत पर मुआवजा के साथ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
खेती-किसान पर कई अहम घोषणा संभव


कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद सरकार और भाजपा की योजना इस मामले में किसानों को साधने के साथ-साथ विपक्ष को अलग-थलग करने की है। पार्टी के स्तर पर हरियाणा और यूपी सरकारों को आंदोलन खत्म कराने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार को गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत देने का रास्ता तलाशने के लिए कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि बुधवार की कैबिनेट की बैठक और 29 नवंबर से शुरू हो रहे शीत सत्र के दौरान सरकार कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए कई अहम घोषणा कर सकती है।


किसान संगठनों के अंतिम रुख के बाद फैसला
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक कृषि कानूनों की वापसी के बाद नजरें किसान संगठनों पर है। सरकार आंदोलन खत्म करने के लिए किसान संगठनों की ओर से अपना रुख स्पष्टï करने के बाद भावी रणनीति बनाएगी। दरअसल सरकार को उम्मीद थी कि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद आंदोलन में नरमी आएगी। हालांकि किसान संगठन पहले की तरह एमएसपी पर कानूनी गारंटी के साथ किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और मृत किसानों के परिजनों को मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।
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