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जनसुविधा की दृष्टि से हमने किया राज्य में 29 नई तहसीलों और 4 नए अनुविभागों का गठन : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर, 08 अगस्त (आरएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज ”लोकवाणी” की 20वीं कड़ी में ”आदिवासी अंचलों की अपेक्षाएं और विकास” विषय पर प्रदेशवासियों से बात-चीत करते हुए सबसे पहले छत्तीसगढ़ी में प्रदेशवासियों को पारंपरिक हरेली तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनुसार हरेली साल का पहला त्यौहार है।
 

 

रायपुर, 08 अगस्त (आरएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज ”लोकवाणी” की 20वीं कड़ी में ”आदिवासी अंचलों की अपेक्षाएं और विकास” विषय पर प्रदेशवासियों से बात-चीत करते हुए सबसे पहले छत्तीसगढ़ी में प्रदेशवासियों को पारंपरिक हरेली तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनुसार हरेली साल का पहला त्यौहार है। इस दिन अपने गांव-घर, गौठान को लीप-पोत कर तैयार किया जाता है। गौमाता की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढिय़ा भावना को ध्यान में रखते हुए हरेली सहित पांच त्यौहारों में सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। उन्होने विश्व आदिवासी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश में पहली बार विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की परंपराओं, संस्कृतियों और उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेशवासियों को अगस्त माह में आने वाले त्यौहार हरेली, नागपंचमी, राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस, ओणम, राखी, कमरछठ और कृष्ण जन्माष्टमी की भी बधाई दी।
29 नई तहसीलों और 04 अनुविभागों का गठन
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के सतीश उपाध्याय, बालोद जिले के युवा विनय कुमार मरकाम और बस्तर अंचल के दरभा के रहने वाले सोमनाथ से हुई बातचीत का उत्तर देते हुए कहा कि हमने ढाई वर्षों में 29 नई तहसीलें और 4 नए अनुविभाग गठित किए हैं, उनमें से अधिकतर आदिवासी अंचल में ही हैं। कोरिया जिले में पटना के साथ चिरमिरी और केल्हारी तहसीलें भी गठित की गई हैं। इसके अलावा कबीरधाम जिले में रेंगाखार-कला, सरगुजा जिले में दरिमा, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में रामचंद्रपुर, सामरी, सूरजपुर जिले में लटोरी, बिहारपुर, जशपुर जिले में सन्ना और सुकमा जिले में गादीरास आदि प्रमुख हैं। इसी तरह चार नवीन अनुविभागों में दंतेवाड़ा का बड़े बचेली और बस्तर का लोहंडीगुड़ा शामिल है। बरसों पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए गौरेला – पेण्ड्रा – मरवाही को जिला ही नहीं बनाया गया बल्कि आदिवासी बहुल आबादी वाले इस क्षेत्र को उनका हक भी दिया गया। हमारा यह मानना है कि नई प्रशासनिक इकाईयों के गठन से लोगों को अपनी भूमि, खेती-किसानी से संबंधित काम, बच्चों की पढ़ाई, नौकरी या रोजगार से संबंधित कामों के लिए आसानी होगी। सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा। इसे ही हमने प्रशासनिक संवेदनशीलता का मूलमंत्र बनाया है। उन्होंने कहा कि जहां तक कोरिया जिले के मेरीन फॉसिल्स पार्क – जैव विविधता पार्क का सवाल है, हम सिर्फ कोरिया ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जिले में अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को सहेजने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं।

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