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गोधन न्याय योजना का दिख रहा असर

छत्तीसगढ़ की महिलायें आत्मनिर्भर बनने लगी : एम गीता, कृषि उत्पादन आयुक्त रायपुर , 14 JULY..(RNS). ..छत्तीसगढ़ में संचालित गोधन न्याय योजना से गोठान में काम करने वाली महिलाएं आत्मनिर्भर बनने लगी हैं। शासन ने मवेशियों को सुरक्षा व पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोधन न्याय योजना की शुरुआत 20 जुलाई 2020 में
 

गोधन न्याय योजना का दिख रहा असर

छत्तीसगढ़ की महिलायें आत्मनिर्भर बनने लगी : एम गीता, कृषि उत्पादन आयुक्त

रायपुर , 14 JULY..(RNS). ..छत्तीसगढ़ में संचालित गोधन न्याय योजना से गोठान में काम करने वाली महिलाएं आत्मनिर्भर बनने लगी हैं। शासन ने मवेशियों को सुरक्षा व पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोधन न्याय योजना की शुरुआत 20 जुलाई 2020 में थी।

इस योजना के तहत सरकार 2 प्रति किलो की दर से गोबर खरीद रही है, 21 जुलाई 2020 को प्रदेश में पहली बार पशुपालकों से गोबर की खरीदी की गई थी।

शुरूआत में इस योजना का मजाक उड़ाया गया, लेकिन वर्तमान में इस योजना ने प्रदेश के विभिन्न गोठानों में काम कर रही वाली महिलाओं की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल कर रख दी है।

करोंड़ों का लाभ, वर्मी कंपोस्ट निर्माण से कमा रही महिलाएं

गौठानों से जुड़े स्व-सहायता समूह की 85,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पादों का निर्माण, आय मूलक गतिविधियों का संचालन कर, अब तक 43 करोड़ 49 लाख रुपए से अधिक आय अर्जित कर चुकी है, जबकि गोधन न्याय योजना को शुरू किए अभी एक साल भी नहीं हुआ है।

प्रदेश के 1160 से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। गोठान अब स्वयं गोबर खरीदी कर रहे हैं। महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन करने लगे हैं।

अब तक हो चुकी है कुल 1 करोड़ 20 लाख से अधिक की आय

इस योजना के माध्यम से पशुपालकों, किसानों से 96 करोड़ रुपये की गोबर खरीदी हो चुकी है। वही राजधानी की बात की जाये तो नगर निगम के अपर आयुक्त पुलक भट्‌टाचार्य व तात्कालिक नगर निगम रायपुर आयुक्त सौरभ कुमार के मार्गदर्शन में अब तक गौठानों के माध्यम से विक्रय किये गये, वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट खाद से कुल 1 करोड़ 20 लाख 31 हजार 8 सौ 43 रुपए की आय हो चुकी हैं।

प्रदेश में 5590 गौठानों का संचालन हो रहा है

सरकार द्वारा पशुओं के लिए वर्तमान में कुल 5590 गौठान संचालित हैं। वहीं कुल 9950 गौठान के निर्माण की स्वीकृति दी गई हैं। इतना ही नहीं इस योजना से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 80,000 महिलाओं को आजीविका मिली है, गोठानों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को को अब तक 27.78 करोड़ की आय प्राप्त हुई है, राजधानी रायपुर में ही 18 स्व-सहायता समूहों में 86 महिलाएं कार्यरत हैं।

हाल ही में कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गोठानों में उत्पादित 3,06,779 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट में से, 1,44,320 क्विंटल खाद का विक्रय किया जा चुका है। राज्य के 5590 गौठानों में से 913 गोठान स्वावलंबी बन चुके हैं। उक्त जानकारी एक बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने दी है।

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